कुंभ मेला क्या है कुम्भ का मेला क्यों मनाया जाता है | KUMBH MELA PAR NIBANDH KUMBH MELA KYA HAI KYUN MANAYA JATA HAI ?

 कुंभ मेला पर निबंध | कुंभ मेला क्या है ?| कुंभ मेला क्या होता है ? | कुम्भ का मेला क्यों मनाया जाता है?KUMBH MELA KYA HAI?KUMBH MELA KYUN MANAYA JATA HAI?,KUMBH MELA PAR NIBANDH

         

कुंभ मेला क्या है कुम्भ का मेला क्यों मनाया जाता है


दोस्तों कुंभ मेला हमारी सनातन संस्कृति का एक बहुत बड़ा प्रतीक है कुम्भ 

का मेला एक बहुत बड़े त्यौहार के रूप में मनाया जाता है इसमें देश-विदेश 

के कोने-कोने से लोग कुंभ पर्व का लाभ लेने आते है। दोस्तों बात करें क्यों 

मनाया जाता है ?कुंभ का मेला और कुम्भ के मेला का इतिहास क्या है ? तो 

आपको बता दें कि कुंभ के मेले का इतिहास लगभग 800 से 900 साल 

पुराना है या कुछ लोगों का मानना है कि इससे भी ज्यादा पुराना हो सकता 

है इसका अभी तक के दिए गए पुराने दस्तावेजों और पुराणों में कुंभ के मेले 

के शुरू होने का वर्णन नहीं है क्यूंकि इतने प्राचीन समय से ये कुम्भ का पर्व 

मनाया जाता रहा है। 


लेकिन ये क्यों मनाया जाता है इसके बारे में एक कथा है जो पुराणों में वर्णित 

है एक बार महर्षि दुर्वासा ने नाराज होकर इंद्र और देवताओं को श्राप दे 

दिया था जिसके कारण देवताओं की शक्ति छींड होने लगी और वे कमजोर 

होने लगे उनकी शक्तियां कम होने लगी ,ये बात जब राक्षसों के राजा को 

पता चली तो उन्होंने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित 

कर दिया,इससे सभी ओर हाहाकार मच गया। फिर सभी देवता ब्रम्हा जी 

की सलाह से भगवान् विष्णु की शरण में पहुंचे तब भगवान् विष्णु ने उन्हें 

क्षीर सागर में ,सागर मंथन (जैसे मटके में मथानी से मही से मक्खन निकला 

जाता है )करके अमृत कलश निकालने की आज्ञा दी लेकिन देवता तो 

कमजोर हो चुके थे फिर उन्होंने सलाह दी इस कार्य में असुरों (राक्षसों ) का 

सहयोग लें। अब राक्षसों और देवताओं के द्वारा समुद्र मंथन किया जाने लगा 

और जैसे ही अमृत कलश निकला तो इंद्र ने अपने बेटे जयंत को सलाह दी 

कि अमृत कलश लेकर भाग जाए और जयंत अमृत कलश लेकर भागने 

लगा उसे रास्ते में असुरों ने पकड़ लिया और वहां पर राक्षसों और देवताओं 

के बीच 12 दिनों तक युद्ध चलता रहा लेकिन देवता कमजोर थे हार गए 

फिर भगवान् विष्णु ने मोहिनी का रूप रखकर अमृत असुरों से छुड़ाकर 

देवताओं को पिलाया। 


कुंभ मेला कहां-कहां लगता है?

KUMBH MELA KAHA-KAHA LAGTA HAI ?


दोस्तों अभी ऊपर बताया गया कि देवताओं और असुरों में 12 दिन तक युद्ध 

चला था जिसके कारण अमृत की बूँदें चार स्थानों पर गिरी थी हरिद्वार, 

इलाहबाद(प्रयागराज), उज्जैन और नासिक हर प्रत्येक तीन साल में एक बार 

कुम्भ का  मेला भरता है जैसे इस बार हरिद्वार में कुम्भ का मेला है तो तीन 

साल बाद इलाहबाद और तीन साल बाद उज्जैन फिर नासिक ऐसे करके पूरे 

12 साल बाद कुम्भ का मेला फिर से हरिद्वार में होगा। 


कुम्भ क्या है ?

KUMBH KYA HAI ? 


दोस्तों कुम्भ का मतलब घड़ा होता है या कलश होता है क्यूंकि अमृत कलश 

में ही था इसीलिए इसे कुंभ कहा जाता है। 


अर्ध कुम्भ क्या है ?

ARDH KUMBH KYA HAI ?


दोस्तों हरिद्वार और प्रयागराज में दो कुम्भ हो जाते है और इनके बीच में छ: 

वर्ष का अंतर होता है तब अर्ध कुंभ होता है। 


सिंहस्थ क्या है ?

SINHASTH KYA HAI ?



दोस्तों उज्जैन में कुंभ का मेला लगता है जब बृहस्पति, सिंह राशि में और 

सूर्य, मेष राशि में प्रवेश करता है क्यूंकि इस कुम्भ का सम्बन्ध सिंह राशि से 

होता है इसीलिए सिंहस्थ कहा जाता है। 



महाकुंभ क्या होता है ?
MAHAKUMBH KYA HOTA HAI ?


दोस्तों जब बारह 12 पूर्ण कुंभ हो जाते है तब 144 बर्ष बाद महाकुंभ का 

मेला प्रयागराज में मनाया जाता है लेकिन कहा जाता है कि मुख्य रूप से 

144 बर्ष बाद यह स्वर्ग में मनाया जाता है। 


12 बारह बर्ष में पूर्णकुंभ क्यों मनाया जाता है ?
12 BARSH ME PURNKUMBH KYUN MANAYA JATA HAI?


क्यूंकि पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि पृथ्वी का एक बर्ष ,देवताओं के 

एक दिन के बराबर होता है और असुरों और देवताओं के बीच 12 बारह 

दिन तक युद्ध चला था। 



 

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