प्रमुख विद्रोह सन् 1757 ई0 से 1856 ई0 तक | Important revolts before 1857 Indian History in hindi

आज के इस लेख में हमने 1757 ई0 से 1856 ई0 तक हुए प्रमुख विद्रोहों को स्थान दिया है। जिसमें आप पढ़ेंगे जैसे:- सन्यासी विद्रोह, चुआर या चौरा विद्रोह, संथाल विद्रोह, मुण्डा विद्रोह, रम्पा विद्रोह, रामोसी विद्रोह, प्रथम सैनिक विद्रोह। इन विद्रोहों के विषय में विस्तृत अध्यन करेंगे तो आप इस लेख को पूरा समझने के लिए शुरू से अंत तक जरूर पढ़ें ये आपकी प्रतियोगी परीक्षाओं के भी काम आने वाला है। 
प्रमुख विद्रोह सन् 1757 ई0 से 1856 ई0 तक | Important revolts before 1857 Indian History in hindi


प्रमुख विद्रोह 1757 ई0 से 1856 ई0 तक :-


सन्यासी विद्रोह , 1770 ई0 :-


कारण - ब्रिटिश नीति से बंगाल का पोषण तथा 1770 ई0 का अकाल।

तीर्थ यात्रा पर प्रतिबंध लगाना मुख्य कारण था।

विद्रोही - शंकराचार्य समर्थक सन्यासी

दमनकर्त्ता - वारेन हेस्टिंग्ज

घटनाएं - कम्पनी कोष तथा कोठियों पर आक्रमण।

विद्रोह का वर्णन - बंकिमचंद्र चटर्जी के आनंदमठ में।

चुआर या चौरा विद्रोह :- 

सन् 1768 ई0 में मिदनापुर जिले के दलभूम , कैलापाल , ढोल्का तथा बाराभूम के राजाओं के साथ चुआर लोगों ने आत्म विनाश की नीति अपनाते हुए यूनियन जैक का विरोध किया।

कोल विद्रोह - 

छोटा नागपुर क्षेत्र ( बिहार ) की कृषि भूमि परम्परागत ‘‘ मण्डों ’’ से छीन कर मुसलमानों एवं सिखों को देने पर कोलों ने सन् 1831 इ्र0 में बाहरी लोगों ( दिकु ) की हत्याएं कर विद्रोह किया। जो रांची , हजारबाग , पलाम आदि क्षेत्रों में विस्तृत था।

संथाल विद्रोह ( 1855 - 57 ) - 

राजमहल क्षेत्र की यह कृषक जनजाति राजस्व के बोझ तथा बंगारी से त्रस्त हो कर सिद्धू तथा कान्हू के नेतृत्व में स्वयं को कम्पनी शासन का अंत कर स्वतंत्र घोषित कर दी।

अंततः सरकार को पृथक संथाल परगना ( विनिमय रहित जिला ) बना कर शांति व्यवस्था करना पड़ी।

मुण्डा विद्रोह - 

रांची के दक्षिणी क्षेत्र में जमींदारी प्रथा , जबरन ईसाई बनाना तथा खूंटकट्टी प्रथा पर रोक लगाने के कारण सन् 1874 ई0 में यहां के लोग अपनी जमीनें बचाने कानूनी लड़ाई लड़ते रहे जिसे सरदारी लड़ाई कहा गया। सन् 1895 ई0 में इसका नेतृत्व बिरसा मुण्डा ने किया जो प्रचार के प्रभाव से इसाई बन गया था तथा जल्दी वापस हो कर नया मत चलाया और ‘‘ सिंग बोगा ’’ की पूजा हेतु प्रेरित किया। ये लोग तीरन्दाजी का अभ्यास महारानी विक्टोरिया के पुतले बना कर उस पर करते थे। जनवरी 1900 ई0 में विद्रोह फैल गया।

इस महाविद्रोह के फलस्वरूप सरकार इस क्षेत्र में बेगारी प्रतिबंधित कर खूंटकट्टी ( सामुहिक भू स्वामित्व आधारित कृषि व्यवस्था ) को मान्यता दे दी।

रम्पा विद्रोह ( सन् 1879 ई0 से 1924 ई0 तक रह रह कर ) -


तात्कालिक कारण - मनसबदारों द्वारा लकड़ी तथा चराई कर में वृद्धि।

अन्य कारण - झूम खेती ( पेड़ू ) पर प्रतिबंध , ताड़ी बनाने पर रोक

नेता - राजा अनंतरैया (1884 ई0 में ) एवं अल्लूरी सीताराम राजू (1922 - 24 इ्र्र0 में)

सितम्बर 1924 ई0 तक मालाबार स्पेशल पुलिस तथा आसाम राइफल्स की सहायता से समाप्त किया गया।


रामोसी विद्रोह ( 1822 - 1883 ) -


कारण - साम्राज्यवादी आर्थिक शोषण पर रानाडे के विचार।

हिन्दु पुनरूत्थान की प्रवृत्ति एवं दक्षिण के अकाल का दुष्प्रभाव।

घटनाएं - सन् 1822 ई0 को सरदार चित्तर सिंह के नेतृत्व में सतारा के समपावर्ती क्षेत्र लूटे गए। सन् 1826 इ्र0 से 1829 इ्र0 तक अशांति बनी रही।

सितम्बर 1839 ई0 को सतारा नरेश प्रताप सिंह को पदच्युत करने पर नरसिंह दत्तात्रेय पेतकर के नेतृत्व में बादामी के किले पर सतारा नरेश की पताका फहरा दी गई।

सन् 1879 ई0 में महाराष्ट्र के राबिन हुड नाम से चर्चित बलवंत फड़के को गिरफ्तार कर लिया गया किन्तु दौलता रामोसी के नेतृत्व में रामोसी 1883 ई0 तक अंग्रेजों के सिरदर्द बने रहे।

महत्वपूर्ण तथ्य :-

- भागलपुर से राजमहल के बीच का क्षेत्र ‘‘ दमन - ए - कोह ’’ ( संथाल विद्रोह का क्षेत्र ) है।

प्रमुख सैनिक विद्रोह

सन् 1764 ई0 :- हेक्टर मुनरो की एक बटालियन बक्सर की रणभूमि में मीर कासिम से जा मिली।

आधुनिक भारत : महत्वपूर्ण तथ्य

- साम्प्रदायिक दंगे - 1925 - 1937

- मेनपुरी षडयंत्र केस का संबंध राम प्रसाद बिस्मिल से है जिन्हें काकोरी काण्ड में फांसी हुई।

- सूर्यसेन - 1930 ई0 के चटगांव आर्मरी रेड केस में 1933 ई0 को फांसी हुई।

- लाहौर षडयंत्र केस - भगत सिंह एव बी0 के0 दत्त

- लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज के लिए जिम्मेदार - स्कॉट

- भारतीय राजाओं का वकील - सर लैजली स्कॉट

- दल खालसा - कर्पूर सिंह

- 1934 ई0 को

- निजाम की सेना का प्रशिक्षक - रेमाण्ड फ्रांसीसी था। 1798 ई0

- सिंधिया की सेना का प्रषशिक्षक - पेशेन फ्रांसीसी था। 1798 ई0

- कम्पनी व्यापारियों के फ्री - पास पर पाबंदी लगाई गई - वारेन हेस्टिंग्ज द्वारा।

- रेग्यूलेटिंग एक्ट का रचयिता एवं लागू करने वाला - लार्ड नार्थ था जिसने राबर्ट क्लाइव से परामर्श प्राप्त किया।

- वारेन हेस्टिंग्ज पर महाभियोग लगाने वाला - बर्क

- प्रेस से प्रतिबंध हटाने के कार्य में चार्ल्स मैटकॉफ का सहयोगी - लार्ड मैकाले

- लार्ड वैलेजली स्वयं को बंगाल का शेर कहता था।

- लार्ड मैकाले भारत आने वाले चौथे विधि सदस्य थे।

प्रथम सैनिक विद्रोह : 

सन् 1765 ई0 को बर्मा के प्रश्न पर बंगाल की 15 वीं बटालियन ने रघुनाथ सिंह , उरावगिर सिंह एवं युसुफ खान के नेतृत्व में समुद्र यात्रा को लेकर विद्रोह कर दिया जिसे प्रथम सैनिक विद्रोह माना जाता है।

- पेशवा बाजीराव द्वितीय के बेसिन पलायन से वैलेजली ने मराठा राजनीति में हस्तक्षेप किया।

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Susheel Tiwari

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